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#40 PANCHTANTRA KI KAHANIYA- HINDI STORY- MORAL STORY IN HINDI


पत्थर(HINDI STORY)


नदी पहाड़ो की कठिन और लंबी यात्रा के बाद तराई में पहुंची। उसके दोनों ही किनारो पर गोलाकार,अंडाकार और बिना किसी निश्चित आकार के असंख्य पत्थरों का ढेर सा लगा हुआ था। इनमे से दो पत्थरों के बीच आपस में परिचय बढ़ने लगा। इनमे से एक पत्थर एकदम गोल-मटोल, चिकना और अत्यंत आकर्षक था, जबकि दूसरा पत्थर खुरदुरा और अनाकर्षक था। एक दिन खुरदुरे पत्थर ने चिकने पत्थर से पूछा, 'हम दोनों ही ऊचें पर्वतों से बहकर आए है फिर भी तुम इतने गोल-मटोल, और आकर्षक क्यों हो, जबकि में नहीं? 'यह सुनकर चिकना पत्थर बोला, 'शुरआत में मैं भी तुम्हारी तरह था लेकिन उसके बाद निरंतर कई सालों तक बहता और लगातार टूटता व घिसता रहा। तब जाकर मैंने यह रूप पाया। मेरे पास यह विकल्प था की मैं इन कठिनाईओं से बच जाऊं और आराम से एक किनारे  पर पड़ा रहूं। तुम अपने इस रूप से निराश मत हो। तुम्हे अभी और संघर्ष करना है। निरंतर संघर्ष करते रहे तो एक दिन तुम मुझसे भी अधिक सुंदर, गोल-मटोल और आकर्षक बन जाओगे।


मंत्र :- चाहे कितनी ही विषम परिस्थिति में  क्यों न हों, संघर्ष करना मत छोड़िए।  

Team:- Bthenext
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