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#50 PANCHTANTRA KI KAHANIYA- HINDI STORY- HINDI STORY WITH MORAL

बंधनो से मुक्ति (HINDI STORY)


आषाढ़ माह की दोपहर थी। भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ भ्रमण पर जा रहे थे। चारों तरफ बिखरी थी तो बस रेत ही रेत। रेत पर चलने के कारण तथागत के पैरों निशान बनते जा रहे थे।  तभी वहां  ज्योतिषी आये वो उसी रास्ते से अपने घर जा रहे थे। उन्होंने रेत पर बुद्ध के पैरों के निशान देखें। वह उन्हें देख रहा था और उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। उसने अपने जीवन में ऐसे पदचिह्न नहीं देखे थे। ज्योतिषी ने सोचा शायद यह पदचिह्न किसी चक्रवर्ती सम्राट के हो सकते है। लेकिन सामने जब उसने बुद्ध को देखा तो उसे यकीन नहीं हुआ क्योंकि यह पदचिह्न एक सन्यासी व्यक्ति के थे। बुद्ध के चेहरे पर एक चमकती कांति थी ज्योतिषी ने हाथ जोड़कर निवेदन किया की आपके पैरों में जो पद्द है, वह अति दुर्लभ है। हमारी चक्रवर्ती सम्राट होना चाहिए, परन्तु आप तो ? भगवान बुद्ध हंसे और कहा, 'आपका यह ज्योतिषी काम करता था। अब मैं सब बंधनो से मुक्त हो गया हूँ। 

मंत्र : जब आप बंधनो से मुक्त हो जाते है तो ईश्वर का परमतत्व ज्ञान ही आपके पास रहता है।   

Team:- bthenext

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